Saturday, July 23, 2016

नाम पाक काम नापाक !



पत्रांक-932-936                                                                     दिनांक-19/o07/2016

सेवा में,
श्री राजनाथ सिंह जी,
माननीय गृह मंत्री,
भारत सरकार,
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली-110001

विषय :- नाम पाक काम नापाक ! 
संदर्भ :- दैनिक जागरण, गुरुग्राम, दिनांक-19 जुलाई, 2016
महोदय,
      उक्त समाचार से यह जानकारी मिली है कि कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और अलगाववाद के विरुद्ध पूरी संसद एकजुट दिखाई पड़ी ! हो सकता है कि यह भारत सरकार और आपके प्रयत्नों के फलस्वरूप हो सका हो ! आपने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में फटकार लगाई और यह भी कहा कि नाम तो पाक है पर काम नापाक है ! स्पष्ट है कि भारत सरकार वाक्.शूर है, किंतु कार्यशूर नहीं है ! यदि पाकिस्तान नापाक है तो भारत सरकार नाकाम है !
   पिछले दो वर्षों में कश्मीर मोर्चे पर –
1.       अनेक पाकिस्तानी और आतंकी आक्रमणों से अनेक हिंदुस्थानी मारे गए और अनेक घायल हुए !
2.       पाकिस्तानियों और कश्मीरी अलगाववादियों और पत्थरबाजों के आक्रमणों से अनेक हिंदुस्थानी जवान, अफसर मारे गए हैं और अनेक घायल हुए हैं !
3.       वर्तमान केन्द्रीय सरकार की कोई दीर्घकालीन कश्मीर नीति नहीं है और न ही कोई सोच है ! हिंदुस्थानी जवान मरने दो और पत्थरबाजों को छोड़ते रहो, यह अल्पकालीन नीति है !
अब तो भारत सरकार ने कमाल का निर्णय लिया है, जिसके अनुसार कश्मीरी अलगाववादियों और पत्थरबाजों को तितर-बितर करने के लिए छर्रे वाली गोलियों के बजाय पानी का फव्वारा और आंसू गैस का इस्तेमाल किया जाएगा यानि देशविरोधी अलगाववादियों को संदेश दे दिया गया है कि वे जवानों को मारते रहें और चूँकि जवान तो मरने के लिए बने हैं, इसलिए उन्हें भूखे भेडियों के सामने निःशस्त्र डाला

सकता है !
      वाह रे भारत सरकार, यह दो वर्षों की सफलता और उपलब्धि है !
      कश्मीर और पाकिस्तान के संबंध में तो कोई निश्चित नीति नहीं है, साथ-साथ
      चीन के प्रति भी कोई सुनिश्चित नीति नहीं है ! कृपया बधाई स्वीकारें ! सादर,


                                                              भवदीय,

                                                   (डॉ. महेश चन्द्र गुप्त)
                                                     मुख्य परामर्शदाता
 
       प्रतिलिपि :-
1.       माननीय श्री मोहन राव जी भागवत, पूज्य सर संघचालक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ,
हेडगेवार भवन, महाल, नागपुर
2.       डॉक्टर प्रवीण भाई तोगड़िया जी, कार्याध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद्, संकटमोचन आश्रम,
सेक्टर-6, रामकृष्णपुरम्, नई दिल्ली-110022
3.       श्री प्रफुल्ल गोरडिया जी, महासचिव, भारतीय जनसंघ, 145, सुंदर नगर, नई दिल्ली
4.       श्री दिनेश चन्द्र त्यागी जी, महामंत्री, सांस्कृतिक गौरव संस्थान, संकटमोचन आश्रम,
सेक्टर-6, रामकृष्णपुरम्, नई दिल्ली-110022

Thursday, July 14, 2016

जाकिर नायक पर कार्यवाही से क्या लाभ ?

      इस्लाम के प्रसिद्ध विद्वान जाकिर नायक पर कार्यवाही करने से क्या लाभ है ? जाकिर जो भी बात कहता है वह कुरान व हदीस के आधार पर कहता है । इस्लाम के सभी आतंकवादी  अपने जिहाद के पीछे कुरान की आयतों और हदीसो को ही बताते हैं  ।  इस्लामी विद्वानों द्वारा कुरान की आयतों व हदीसों के दो अर्थ किए जा रहे हैं एक तो जिहादी अर्थ है जिसका अर्थ जब तक सारी दुनिया से काफिरों को खत्म न कर दिया जाए जिहाद चलना चाहिए व दूसरा अर्थ है कि यह उस समय की आयते हैं जब युद्ध चल रहा हो । सरकार के लिए चुनौती है कि वह आयतों के जिहादी अर्थ को किस प्रकार रोकेगी । जिहादी अर्थ को रोक पाना वर्तमान केन्द्र सरकार के बस की बात तो दिखाई नहीं देती है क्याेंकि पिछले दो वर्ष से केन्द्र में भाजपा की सरकार है । यह हाल तो जब है जबकि जाकिर नायक का पीस टीवी पूरे देश में कई वर्षों से दिखाया जाता है । यह बात विचारणीय है कि किसी सरकारी अधि‍कारी या नेता को यह पता नहीं चला जाकिर नायक के भाषण में कुछ गलत है । या जिन्हें पता चला जैसे भाजपा के नेता बलबीर पुंज या पूर्व नौकरशाह सतपाल मलिक उनकी किसी ने सुनी नहीं ।

       यहां विषय यह है कि केवल जाकिर नायक पर कार्यवाही करने से बात नहीं बनेगी बल्कि कुरान की उन आयतों पर पूर्ण रूप से रोक लगनी चाहिए जिनका जिहादी अर्थ हो पाना संभव है आैर इसके लिए भारतीय मुसलमानों को स्वयं आगे आना चाहिए । और यदि भारतीय मुसलमान इस ओर सोचने के लिए भी तैयार नहीं हैं तो यह कार्य कठाेरता पूर्वक सरकार को करना चाहिए । यहां यह भी विचारणीय है कि जाकिर नायक को सउदी अरब के सर्वश्रेष्ठ पुरुस्कार से नवाजा गया है और सउदी अरब अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए भारत में मदरसे खोल रहा है । सरकार को उन मदरसों (जो सउदी इस्लामी विचारधारा को देश में फैला रहे हैं )पर भी रोक लगानी चाहिए ।  सरकार को यह भी समझना चाहिए कि भारत के लिए यह समस्या केवल आज की न होकर दशकों पुरानी है  । सरकार को इस बात का पता चलाने के लिए भी एक आयाेग का गठन करना चाहिए कि भारत का बंटवारा क्याें हुआ था ? क्या इसके पीछे भी जिहाद ही जिम्मेंदार था ? कश्मारी में जिहाद क्यों किया जा रहा है ? पाकिस्तान भारत से दुश्मनी क्यों रखता है ?
     क्या इन सभी का कारण जिहाद ही है यदि हां तो  आयतों के जिहादी अर्थ पर  तुरंत रोक लगाने का कार्य केन्द्र की भाजपा सरकार को करना चाहिए ।



Friday, June 17, 2016

भाजपा पत्रकारों की तरह नहीं सत्तारूढ़ दल की तरह काम करे

     भाजपा के विभि‍न्न वरिष्ठ नेताओं जैसे बाबू हुकुम सिंह राजेन्द्र अग्रवाल  द्वारा हिदुओं के पलायन की सूची जारी की रही है अथवा समाचार दिए जा रहे हैं । यहां पर विषय यह है कि क्या यह पलायन केवल उत्तर प्रदेश में ही हो रहा है । वास्तविक स्थ‍िति यह है कि पलायन हर उस स्थान पर हो रहा है जहां मुसलमानों की आबादी बढ़ती जा रही है। चाहे वह कोई भी प्रदेश हो । भाजपा को यह समझना चाहिए कि आज वह केन्द्र में सत्ता में है और भारत के कई राज्यों में भी भाजपा की सरकारे चल रही है । 
        समस्या मुसलमानों की इस सोच में है कि शरीयत का शासन सर्वश्रेष्ठ है और वे परिवार नियोजन नहीं  अपनाएगें । दारूल उलूम देवबंद ने इस पर फतवा भी दिया है कि परिवार नियोजन इस्लाम में अवैध है ।  http://www.darulifta-deoband.com/home/en/Halal--Haram/6866  जनतंत्र में जनसंख्या के आधार पर ही सत्ता आती है । परिवार नियोजन न अपनाने पर मुसलमानों की संख्या धीरेधीरे बढ़ती ही चली जाएगी । यह एक कड़वा सत्य है कि अधि‍कतर मुस्लि‍म बहुत देशों में जहां शरीयत का शासन नहीं है मुसलमान शरीयत का शासन लागू करने की मांग कर रहे हैं ।   इस्लाम की नजर में हिन्दू एक दोयम श्रेणी का नागरिक है जिसे उसके शासन में मंदिर भी बनाने नहीं दिया जाएगा ( जैसे सउदी अरब में मंदिर नहीं बनाया जा सकता )
 
 

         भाजपा को चाहिए कि मीडिया का काम न करे बल्कि यह समझे कि वे आज सत्ता में हैं । भाजपा की केन्द्रीय सरकार को जनसंख्या नियंत्रण कानून तुरंत लागू करना चाहिए और यह बहाना भी नहीं बनाना चाहिए कि उसका राज्य सभा में बहुमत नहीं है यदि अावश्यता पड़ती है तो संसद का संयुक्त सत्र बुलाकर यह कानून तुरतं लागू कर देना चाहिए ( जैसा वाजपेयी सरकार में POTA कानून लागू किया गया था)।
   

Monday, January 18, 2016

क्या भाजपा की मजबूरी है कोई काम न करना




    श्री अमित शाह जी
    राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी
    11- अशोक रोड, नई दिल्ली-1110001
विषय:- अनुच्छेद 370 समेत मुख्य मुद्दों के लिए नहीं है बहुमत, मंदिर के लिए चाहिए 370 सीटें |
सन्दर्भ:-दैनिक जागरण नई दिल्ली, दिनांक 27 मई 2015(छाया प्रति संलग्न)
महोदय् ,

  उपर्युक्त विषय पर दैनिक जागरण में छपे समाचार के अनुसार आपने निम्नलिखित वक्तव्य दिया है:-
“अनुच्छेद 370 हटाने, राममंदिर निर्माण और समान  नागरिक संहिता लागू करने जैसे पार्टी के कोर मुद्दे को सांसदों की कमी का हवाले देते हुए टाल दिया | भाजपा इन कोर मुद्दों से पीछे नहीं हटी है, लेकिन इन्हें पूरा करने के लायक फिलहाल पार्टी के पास बहुमत नहीं है | इसके लिए भाजपा को लोकसभा में अकेले कम-से-कम 370 सीटें चाहिए |”
इस विषय में भाजपा और संघ परिवार की अनेक संस्थाओं के कार्यकर्ता गण यह बोल रहे हैं कि-
(1). क्या 370 सीटें मिलेगी तभी आप कश्मीर से धारा 370 हटाने और राममंदिर का निर्माण कराने और सामान नागरिक संहिता लागू करने का काम करेंगे | क्या ऐसा चुनाव से पहले कहा था यदि नहीं तो क्यों ?
(2). जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के संबंध में संसद में  बहुमत न होने का आप का उल्लेख इसलिए अनुचित है कि उक्त अनुच्छेद में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति लोकअधिसूचना द्वारा घोषणा कर सकेगा कि यह अनुच्छेद प्रवर्तन में नहीं रहेगा किन्तु ऐसी अधिसूचना किए जाने से पहले उस राज्य की संविधान सभा की सिफारिश आवश्यक होगी |
स्पष्ट है कि राष्ट्रपति जी लोक अधिसूचना किसी भी समय जारी कर सकते हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा अब जन्नत नशीन हैं | इस संबंध में अच्छा यह होगा कि आप अपने को अनजान सिद्ध न करें और जनता तथा कार्यकर्ताओं को मूर्ख न समझें | इस विषय में आपकी कोई भी दुर्बलता हो सकती है जिसके कारण आप राष्ट्रपति जी से लोक अधिसूचना जारी कराने में विफल हो रहे हैं / हुए हैं |

                जहाँ तक समान नागरिक संहिता और राममन्दिर निर्माण का विषय है इसमें राममन्दिर निर्माण तो साधारण बहुमत से लोकसभा में बिल पेश करके और उसे पारित कराकर राज्य सभा में प्रस्तुत कर के वहाँ पारित कराकर किया जा सकता है  और वहाँ पास न हो तो अनेक दल बेनकाब हो जाएँगे | यदि आप उसे पास ही कराना चाहेंगे तो दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में करा सकते हैं | समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में उच्चतम-न्यायालय ने कई  निर्णय दे रखें हैं | आशा है कि आपने उन्हें देखा होगा यदि नहीं तो देख लेने का कष्ट करें | वैसे भी यह आवश्यक नहीं है कि आप जानते ही हों और याद रखते हों | इसलिए समान नागरिक संहिता भी भाजपा और केन्द्रीय सरकार की इच्छा शक्ति पर निर्भर करती है |
   इतना अवश्य ध्यान रखना होगा कि यदि अगले चार वर्षो में इन तीनों मामलों सहित गोवध बंद करने के बारे में कुछ नहीं किया तो चार वर्ष बाद आपकी सरकार का वही हाल हो सकता है जो अटलविहारी बाजपेयी सरकार का, उसकी निष्क्रियता के कारण हुआ क्योंकि उस सरकार ने भी बहु संख्यक हिन्दू समाज को धोखा दिया और लगातार झूठ का आश्रय लिया | इतना अवश्य है कि चार विषयों में से दो पर भी आप कुछ कर सकें तो यह विश्वास हो सकता है कि चार साल के पश्चात् भाजपा पुनः केंद्र में सत्ता प्राप्त करें |

सुभकामनाओं सहित
आपका


डॉ०महेश चन्द्र गुप्त
सांस्क़तिक गौरव संस्थान

Monday, December 14, 2015

भारतीय मुसलमानों से मेरा प्रश्न -
        जावेद अहमद घमीदी जो पाकिस्तान के एक विद्वान हैं ने बताया है कि आतंकवाद जो मुसलमानों द्वारा फैलाया जा रहा है उसका कारण ये मदरसों में पढ़ाया जा रही चार बाते हैं । पहली दुनिया में अगर कहीं शि‍र्क हो या कुफ्र हो या इख्ति‍हाद हो (apostacy) यादि कोई शख्स इस्लाम छोड दे तो उस सजा मौत होगी और ये सजा हमें नाफिज करने का हक है । दूसरी बात ये सिखाई जाती है कि दुनिया में गैर मुस्ल‍िम सिर्फ महकूम करने लिए पैदा किए गए हैं मुसलमानों के सिवा किसी को दुनिया पर हकूमत करने का हम नहीं है । गैर मुसलमानों की हर हकूमत एक नाजायज हकूमत है जब हमारे पास ताकत होगी हम उसे समाप्त कर देंगे । तीसरी चीज  है कि मुसलमानों की एक ही हकूमत होनी चाहिए जिसे खि‍लाफत कहते है। चौथी चीज कौमी रियासत एक कुफ्र है इसकी कोई जगह इस्लाम नहीं है । ये मुसलमानों के मदरसों में पढायी जाने वाली चार चीजें जो हर मदरसे में पढ़ायी जाती हैं । जब तक ये चीजे हमारे मदरसों में पढ़ायी जाती रहेगीं आतंकवादी पैदा होते रहेंगें । और ये लोग दुनिया को जहन्नम बना देंगे । 
     मेरा भारत के मुसलमानों से प्रश्न है कि क्या भारत के मदरसों में भी यही शि‍क्षा दी जाती है यदि हां तो वे तो इसे तुरंत बंद करे अन्यथा दंगों से बचा नहीं जा सकता । मेरी भारत सरकार से भी मांग है कि वे जांच कमिशन का गठन करे जो यह जांच कर बताए कि भारत के मदरसों में छोटे बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है  ?

Saturday, August 29, 2015

भारतीय सेनाओं में अफसरों की कमी - अंग्रेजी की अनि‍वार्यता के कारण

    सरकार द्वारा भारतीय सेनाओं में अफसरों की कमी के लिए विभिन्न योजनाओं का हवाला दिया गया है जिससे देश के नौजवान सेना की ओर आकर्षित हों व सेना में नौजवानों की कमी समाप्त हो ।
सेना में वास्तविक कमी का कारण है कि एन डी ए व सी डी एस की परीक्षा में अंग्रेजी भाषा में ग्रुप डिस्कशन व साक्षात्कार लिया जाता है जिस कारण हिंदी माध्यम से पढ़े हुए बच्चे इन परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते । हिन्दी माध्यम से पढ़े बच्चे तुरंत अंग्रेजी बातचीत करना प्रारम्भ नहीं कर सकते । क्या कभी इन उच्चाधिकारियों ने भारत के गांवों का भ्रमण किया है जहां आज भी सुबह व सांय के समय सैकड़ों बच्चे सेना के जाने के लिए आवश्यक शारीरिक दक्षता प्राप्त करने के लिए दौड़ते दिखायी देते हैं । एसा नहीं है कि देश के लोगों ने अपने बच्चों को सेना में भेजना बंद कर दिया है अथवा देश में एक योग्य बच्चों का अभाव हो गया है जो सेना में अधिकारी बनने के योग्य न हों ।
      यदि सरकार एेसी परीक्षाओं में अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कर दे तो आवश्यकता से कई गुना भर्ती होना संभव है । केन्द्र सरकार से मांग की जाती है पूरे देश में सभी परीक्षाओं व उच्च शि‍क्षा की पढ़ाई से अग्रेजी की अनि‍वार्यता को समाप्त करे ।

Thursday, July 30, 2015


                       विपश्यना द्वारा व्यसनों से छुटकारा
पहाड़पुर में २६ अप्रैल से ७ मई के शि‍विर में भाग लिया, जिससे मुझे तीन प्रकार के लाभ हुए-
  प्रथम- मेरी दाहिनी भुजा हमेशा कांपती थी, अब कंपन नहीं रहा।
  दूसरा- मुझे बगैर शराब पिये भूख एवं नींद नहीं आती थी, पर अब खुलकर भूख लगती है और नींद भी आती है।
 तीसरा- शराब जैसा दुर्व्यसन जिसे दिन-रात एवं सुबह-शाम पीते रहता था, उससे छुटकारा पाया। ऐसा कल्याणकारी      मार्ग       अगर मेरे जीवन के आठ वर्ष पूर्व मिला होता, तो यह दुर्व्यसन शायद मेरे जीवन में नहीं आया होता।
  मैं चौतमा (बर्मा) से १९३८ में भारत आया और बाद में बादलपुर ग्राम-पंचायत का सरपंच होने के बाद १९७७ से कुछ   कुसंगत  एवं अ‍भि‍मानवश पीने लगा। इसके पहले इस जहर को छूना भी पाप समझता था। अब मैं शराब पीनेवाले भाइयों से हार्दिक कामना करूंगा कि वे साधना-‍शि‍विर में बैठकर पूरा-पूरा लाभ उठायें।
   इस कल्याणकारी मार्ग की एक झलक से ही मेरे जीवन का नक्शा बदलते जा रहा है। काश ! यह मार्ग मुझे पहले ही मिला हेाता । फिर भी मुझे आत्म-संतोष है कि-
 भूला उसे न कहिए जो घर आये शाम को।
कोटि कोटि प्रणाम के साथ आपकी मंगल कामना चाहता हॅूं
                                                                        - संपतलाल (पहाड़पुर, जिला बेतूल, मध्य प्रदेश)
मेरे जीवन-व्यवहार में और समस्याओं के समाधान में काफी सुधार हुआ है। व्यसन से सर्वथा मुक्त‍ि मिल गयी है। अब पूर्ण विश्वास हो गया है कि विपश्यना ही विमुक्त‍ि का एक मात्र मार्ग है।
                                                                              - भैयासाहब सोमकुवर [आयकर अधि‍कारी]
बहुत ही प्रसन्नता अनुभव करता हूं। मन बहुत शांत हो गया है। लोगों से मिलने में बहुत खुलापन आया है और नशे-पते से पूर्णतया मुक्त‍ि मिल गयी है। अधि‍क गहरार्इ से साधना करने के उदे्श्य से ही धम्मगिरि आया हूं।
                                                                                             - ब्रोक पाईटेल (कैनेडा)
[युवा संगीकार जो घूमते-फिरते कहीं शि‍विर का साईनबोर्ड देखकर शि‍विर करने चला आया और फिर कई शि‍विरों में बैठा और सेवा दी।]
लंबे समय तक मैं माद‍क द्रव्यों के सेवन में बुरी तरह व्यस्त रहा। १९७१ में प्रथम शि‍विर के पश्चात से ही केवल शराब को छोड़कर उन सबसे मुक्त‍ि पायी। अब दो वर्षों से तो मदिरापान भी छुट गया। इस ध्यानविधि‍ के अभ्यास से मन की नैसर्गिक समता का अर्थ जाना तथा अनुभव ने यह पुष्ट किया कि सभी नशीले पदार्थ स्वयं असंतुलन उत्पन्न करते हैं जो स्वयमेव अंततोगत्वा दु:ख ही लाते हैं।
इस अभ्यास के फलस्वरूप शरीर और मन को क्षुब्ध करने वाले वातावरण के प्रति सजगता आने से एवं उन पर नियंत्रण कर पाने में समर्थ होने से अब शरीर से स्वस्थ रहता हूं तथा मानसिक रूप से अधि‍क शांत, प्रसन्न तथा बेफिक्र रहने लगा हूं। वर्तमान को जैसा है वैसा स्वीकार करने की क्षमता आ चली है। अन्य व्यक्त‍ियों को बदलने एवं उनकी आलोचना करने की वृत्ति‍ घटती जा रही है। ऐसे सद्रगुण स्वभावत: ही घरेलू वातावरण में अत्यंत मधुर संबंध स्थापित करने वाले होते हैं।
इस कल्याणकारी विधि‍ द्वारा समस्याओं के अनित्य स्वभाव के अधि‍काधि‍क ज्ञान से उनको सुलझाने का मार्ग मिल गया है। देखनेमात्र से वे तिरोहित हो जाती हैं। वैसे अब उतनी समस्याएं रही भी नहीं। पहले चुनौतियों से भागकर बचने का व्यर्थ प्रयास करता था। अब तो वे देखनेमात्र से स्वयं ही शक्त‍िहीन हो जाती हैं।
                                                                       - फ्रीडेल रोजनबक (जर्मनी)
तीन वर्ष की उम्र में माता का देहांत हो जाने के कारण मेरा बचपन बहुत कष्टों में बीता। अपने अध्यवसाय के बलपर मैं इस अवस्था पर पहॅुंचा। परंतु दो वर्ष पूर्व आपके निर्देशक में विपश्यना का मार्ग अपनाने के बाद तो जीवन ही बदल गया। बहुत सुधार हुआ। मदिरा तो बिल्कुल ही छूट गयी। सिगरेट भी बहुत मात्रा में कम हो गयी है। शरीर और मन में तनावों से मु‍क्त‍ि मिली है। विश्वास है कि विपश्यना का अभ्यास करते रहने पर सभी क्षेत्रों में और सुधार होंगे ही।“                                          
                                                                           - ब्रि‍जयसिंघे (श्रीलंका)
१९७२ में विपश्यना सीखने के बाद मेरा गांजे-चरस का व्यसन अब सर्वथा छूट गया। विपश्यना की वजह से अब मेरे मन में इसके प्रति जरा भी आकर्षण नहीं रह गया।       
                                                                               - ब्र‍िगिटी मूलर
विपश्यना साधना की वजह से नशे का मेरा व्यसन अब सर्वथा दूर हो गया है। मेरी मन: स्थि‍ति में बहुत शांति और प्रश्रब्धि‍ आयी है। लोगों  के साथ मेरा व्यवहार अ‍धि‍क प्रसन्नपूर्ण और अधि‍क ईमानदारीपूर्ण होने लगा है। विगत बाईस महीनों के अनुभवों से मुझे लगता है कि मेरे जीवन की यह सबसे म‍हत्वपूर्ण उपलब्धि है।“                                                                               -कु. जोआना रार्बट (यार्कशायर, इंग्लैंड)
इस साधना द्वारा गांजे, चरस और एल. एस. डी. के प्र‍ति मेरी आसक्त‍ि टूटी है। अन्य लोगों के साथ मेरे व्यवहार में बहुत सुधार हुआ है और अनेक प्रकार की दुर्भावनाओं में कमी आयी है। जिन परिस्थि‍तियों में पहले मैं बहुत क्रुद्ध हो उठता था, अब वैसी ही परिस्थि‍तियों का धीरज के साथ सामना कर सकता हूं।
                                                                         - मिकी अबसीन (कैनेडा)
विपश्यना साधना से मेरा नशे का व्यसन टूटा है। मैं पहले मदिरापान किया करता था, अब वह छूट गया है। पहले सिर-दर्द होते ही गोलियां लेनी पड़ती थीं, अब इनसे छुटकारा मिल गया है। मानसिक स्तर पर बहुत शांति अनुभव करता हूं। लोक-व्यवहार में मित्रों के साथ भी जो नाटकभरा जीवन चलता था अब उससे छुटकारा हो गया है। पहले जैसा भावावेश अब मुझमें नहीं रहा है।                         
                                                                         -मौल पीटर (स्वि‍ट्जरलैंड)
मेरे मानस में अब अधि‍क शांति आयी है। औरों के साथ मेरा व्यवहार-जगत सुधरा है। समस्यओं का सामना करने की क्षमता बढ़ी है। मैं यह साधना-पद्धति पाकर अपने धन्य मानता हूं। मुझे जीवन में सही दिशा प्राप्त हो गयी है।                                   
                                                                     -रोडनी जोन परनियर (कैनेडा)
[बत्तीस-वर्षीय; ईसाई अनाथालय में पला; बचपन में अत्यंत उद्ंड; स्कूल छोड़कर चला गया और निरक्षर रहा; बरसों तक गांजे, चरस आदि का सेवन; मार्च १९७३ में मुंबई में विपश्यना शि‍विर में बैठा; तब से उत्तरोत्तर सुधार और अब नशे-पते से पूर्णतया मुक्त]
विपश्यना के अभ्यास से अब नशे-पते की ओर से मेरी रूचि‍ मिटी है और इससे पूर्ण छुटकारा मिल गया है। जीवन में अधि‍क संवेदनशील हो गया हूं और सहायक भी।
                                                    -जोन अलेक्जेंडर पीबल्स (न्यू साउथ वेल्स, आस्ट्रेलिया)
विपश्यना साधना के अभ्यास से अब नशे-पते की ओर से मेरी रूचि मिटि है और इससे पूर्ण छुटकारा मिल गया है। जीवन में अधि‍क जिम्मेदार हो गया हूं। धीरज और करूणा बढ़ी है।“     
                                                                        -एवाल्ड विल्हैल्म (जर्मनी)
पहले नशा-पता करता था, अब विपश्यना के प्रभाव से बिल्कुल छूट गये हैं। जीवन के हर क्षेत्र में सुधार हुए हैं। अपने तनावों के प्रति जागरूक रहने का स्वभाव बढ़ा है। झुंझलाहट आती है तो देर तक टिकती नहीं
                                                                          -पीटर वाद्य (न्यूजीलैंड)
पहले भांग, चरस, गांजा, अफीम, एल.एस.डी. आदि सभी प्रकार के नशों का आदि था। विपश्यना के प्रभाव से अब उनसे पूर्णतया मुक्त हूं। जीवन-व्यवहार में शांति आयी है। समस्याओं का सामना आसानी से कर पाता हूं परिवार के लोंगो के साथ बिगड़े हुए संबंध सुधरे हैं। सब के प्रति मैत्री जागने लगी है   
                                                       -रोनाल्ड योसेव (न्यू जर्सी, अमेरिका) [टेक्नी‍शि‍यन]
मेरे नशे-पते पूरी  तरह छूट गये हैं और य‍ह विपश्यना साधना के प्रभाव से ही हुआ है। मेरा शारीरिक स्वास्थ्य बहुत सुधरा है। मन शांत रहने लगा है, सहिष्णुता और समझ बढ़ी है। समता और मानसिक संतुलन भी।
                                                                      -जोर्ज कासिस (ग्रीस) [मजदूर]
विपश्यना के प्रभाव से मादक पदार्थों का सेवन पूर्णतया छूट गया है। जीवन के हर क्षेत्र-शारीरिक, मानसिक, जनसंपर्क-में सुधार हुए हैं।                                    
                                                                 -फ्रांज जेलसाकर (आस्ट्रेलिया) [छात्र]
इस साधना की वजह से पहले से कम घबराता हूं एवं जीवन के प्रति दृष्टि‍कोण बदला है। पहले मैं सिगरेट पीता था । अब तो धुँआ भी अच्छा नहीं लगता।         
                                                                   -बद्रीप्रसाद तोदी (खग‍ड़ि‍या, बिहार)
विपश्यना साधना से मानसिक शांतता मिली है और व्यसनों से मुक्त‍ि।     
                                                                       -बालकृष्ण जोशी (इगतपुरी)
नशा छूटा हैं और विपश्यना के प्रभाव से छूटा है।                            
                                                                     - जोर्ज कशि‍श (ग्रीस) [मजदूर]
मेरी नशे-पते के प्रति जो आसक्त‍ि थी वह विपश्यना के बल से पूर्णतया छूट गयी और अब मैं किसी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करती।
अभी शारीरिक और मानसिक तनाव, ऐंठन और विकलताएं हैं परंतु जीवन में चिंताएं घटी हैं। चिंतन में अधि‍क स्पष्टता आयी है।                                       
                                                              - कु. एलियानोर मैरी (न्यूजीलैंड) [छात्रा]
१९६५ में एक कार दुर्घटना में मेरी रीढ़ की हड्डी सात जगह से टूट गयी थी और, परिणामत:, कुछ दूर में लकवा हो गया था। १९७६ में विपश्यना शि‍विर में स‍म्म‍िलित होने के बाद इसमें बहुत सुधार हुआ है। मानसिक स्तर पर अब मैं अपने आप के साथ अधि‍क शांति से रह  पाता हूं और लोगों के साथ भी संबंध सुधरे हैं, क्योकिं उन्हें स्वीकारने में आसानी हुई है। पहले चरस, एल.एस.डी., मशरूम और मेस्कालिन जैसे नशों का आदि था। अब विपश्यना के प्रभाव से इनसे पूर्णतया मुक्त हो गया हूं।   
                                                         -मैक्सवैल जोहन रयान (न्यू साउथ वेल्ज, आस्ट्रेलिया) [अध्यापक]
विपश्यना साधना के निश्च‍ित प्रभाव से मेरे सारे नशे-पते छूट गये हैं। मुझे जो माइग्रेन-सिरदर्द का रोग था व‍ह अब काबू में आ गया हैं। मेरे जीवन में अधि‍क सहनशीलता आयी है और अब मुझमें स्वार्थांधता में बहुत कम हुई है।                                                           
                                                                    -नोरिस (आस्ट्रेलिया) [अध्यापक]
इस साधना के निश्चि‍त प्रभाव से मुझे सभी प्रकार के नशे के व्यसनों से सर्वथा मुक्त‍ि मि‍ली है और शारीरिक तथा मानसिक क्षेत्र में अथवा व्यवहार-जगत में समस्याओं के समाधान में बहुत सुधार हुए हैं  
                                                                        -लिंडा कलेंबी (अमेरिका)
धर्म में प्रवेश पाने के पूर्व अनेक प्रकार के नशे करने की आदि थी, लेकिन अब उनसे पूर्णतया छुटकारा हो गया है। और जीवन के हर क्षेत्र में बहुत बड़ा सुधार हुआ है।           
                                                                   -ली एलन सोलोमन (आस्ट्रेलिया)
मैं अब किसी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करती। विपश्यना का नियमित अभ्यास करती हूं और, संभवत:, अब मैं अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति अधि‍क सजग हो गयी हूं। अब मेरे लिए वस्तुत: जीवन में कोई बड़ी समस्याएं नहीं हैं।                                                        
                                                                               -विन्नी (इंग्लैंड)
दस दिन के पहले शि‍विर में शामिल होने के बाद भी मैं पुन: अपने पुराने गंदे रास्ते पर चलने लगा। पंरतु शीघ्र ही सँभल गया। मुझे उस रास्ते का ओछापन और छिछोरापन जल्द ही समझ में आने लगा। अब मैने सभी प्रकार के नशीले पदार्थेां का त्याग कर दिया है। मुझे अपने व्यसनों और आसक्ति‍यों से छुटकारा मिला है। अब मैं अपना अधि‍कतर समय साधना के अभ्यास में और धर्म के अध्ययन में बिताने लगा हूं। मैं आपका आभारी हूं।“                                                           
                                                                              -साधक(अमेरिका)
मैं जब से साधना में से वापस आया हूं, तब से मैंने शराब पीना छोड़ दिया है। पहले मेरे घर में अशां‍ति रहती थी, लेकिन अब नहीं रहती है।                                            
                                                                          -साधक (मुंबई) [मजदूर]
                                  
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